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महाराष्ट्र में सियासी पलटवार: भाजपा को रोकने के लिए शिंदे गुट और मनसे साथ

January 21, 2026 4:49 PM
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर अप्रत्याशित समीकरण सामने आया है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में मेयर पद को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना (शिंदे गुट) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने गठबंधन कर सबको चौंका दिया है। इस गठबंधन का सीधा मकसद नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी को मेयर पद से दूर रखना बताया जा रहा है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्य स्तर पर भाजपा और शिंदे गुट ‘महायुति’ सरकार में साझेदार हैं, लेकिन स्थानीय राजनीति में दोनों दल आमने-सामने आ खड़े हुए हैं। यह फैसला दिखाता है कि नगर निगम की राजनीति में सत्ता का गणित गठबंधन की सीमाओं से ऊपर रखा गया है।

सीटों का खेल और बदला समीकरण

122 सीटों वाली KDMC में बहुमत का आंकड़ा 62 है। चुनाव नतीजों में भाजपा 50 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि शिंदे गुट को 53 सीटें मिली थीं। मनसे को 5 सीटें और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 11 सीटों से संतोष करना पड़ा। मनसे के समर्थन के बाद शिंदे गुट के पास कुल 58 पार्षदों का समर्थन हो गया है, जिससे मेयर चुनाव में उसकी स्थिति निर्णायक हो गई है।

उद्धव गुट को झटका, भाजपा पर दबाव

राजनीतिक रूप से यह गठबंधन उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जिन राज ठाकरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ा गया था, वही मनसे अब शिंदे गुट के साथ खड़ी नजर आ रही है। दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह संकेत है कि स्थानीय निकायों में उसकी बढ़त के बावजूद सत्ता सुनिश्चित नहीं है।

आगे की राजनीति के संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि कल्याण-डोंबिवली का यह घटनाक्रम आने वाले मुंबई महानगरपालिका और अन्य नगर निगम चुनावों के लिए संकेतक हो सकता है। साफ है कि महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन स्थायी नहीं, बल्कि सत्ता की ज़रूरतों के हिसाब से बदलते रहते हैं। यह गठजोड़ महायुति में ‘दरार’ है या शुद्ध रूप से रणनीतिक दांव—इसका जवाब आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा।

Admin

ओम भारद्वाज एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह India Insights News के संस्थापक एवं मालिक हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ वह समाजसेवा और जनहित के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। अपनी वेबसाइट और न्यूज़ चैनल के माध्यम से वह जनता की आवाज़ को मंच देते हैं और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष पत्रकारिता के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।

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