Delhi Airport पर दो विमानों की टक्कर, बड़ा हादसा टला
Delhi के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे एक बड़ा हादसा टल गया, जब स्पाइसजेट की एक फ्लाइट पार्किंग एरिया में खड़े Akasa Air के विमान से टकरा गई। इस घटना में सभी यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित हैं, लेकिन दोनों विमानों को नुकसान पहुंचा है। स्पाइसजेट के विमान के दाहिने विंग को नुकसान हुआ, जबकि अकासा एयर के विमान का बायां विंग टूट गया। घटना के बाद संबंधित फ्लाइट को ग्राउंड कर दिया गया है और अब इसे उड़ान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

Delhi यह हादसा उस समय हुआ जब लेह से आई स्पाइसजेट की फ्लाइट रनवे से गेट की ओर बढ़ रही थी। उसी दौरान अकासा एयर की फ्लाइट QP 1406, जो Delhi से हैदराबाद जाने वाली थी, पुशबैक की प्रक्रिया में थी। यानी एक विमान टैक्सी कर रहा था और दूसरा पीछे की ओर खिसकाया जा रहा था। इसी दौरान दोनों विमानों के विंग आपस में टकरा गए। एयरपोर्ट के व्यस्त माहौल में यह घटना गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि थोड़ी सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती थी।

अकासा एयरलाइंस के प्रवक्ता ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उनका विमान पार्किंग एरिया में खड़ा था और उसे पुशबैक के जरिए रनवे की ओर ले जाया जा रहा था। टक्कर के बाद फ्लाइट को वापस बे में लाया गया। यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए एयरलाइन ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द हैदराबाद भेजा जा सके। एयरलाइन ने यह भी कहा कि सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया। एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह टक्कर कैसे हुई। आमतौर पर एयरपोर्ट पर ग्राउंड मूवमेंट बेहद नियंत्रित और नियमों के तहत होता है, जिसमें एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC), ग्राउंड स्टाफ और पायलट के बीच लगातार समन्वय बना रहता है। ऐसे में इस तरह की घटना कई सवाल खड़े करती है।
Delhi भारत में हाल के महीनों में विमानन से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। मार्च 2026 में इंडिगो की एक फ्लाइट 6E 579, जो विशाखापट्टनम से Delhi आ रही थी, के एक इंजन में खराबी आ गई थी। विमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। उस समय विमान में करीब 160 यात्री सवार थे और रनवे पर ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित की गई थी। यह विमान बोइंग 737 था, जिसे तुर्की की कोरेनडन एयरलाइंस से लीज पर लिया गया था।
इसी तरह जनवरी 2026 में सऊदिया एयरलाइंस की फ्लाइट SV-891, जो लखनऊ से जेद्दा जा रही थी, में केबिन प्रेशर की समस्या सामने आई थी। विमान जब मुंबई के पास पहुंचा, तब यात्रियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसके बाद एहतियातन इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट में 275 यात्री, 4 पायलट और 6 क्रू मेंबर सवार थे। समय रहते लिए गए फैसले से एक बड़ा हादसा टल गया।

दिसंबर 2025 में भी एअर इंडिया की फ्लाइट AI887 के साथ एक गंभीर घटना हुई थी।Delhi से मुंबई जा रही इस फ्लाइट के टेक-ऑफ के कुछ देर बाद ही एक इंजन ने काम करना बंद कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंजन का ऑइल प्रेशर शून्य हो गया था, जिसके चलते विमान को वापस दिल्ली लौटना पड़ा। हालांकि, दो इंजन वाले विमान एक इंजन के सहारे भी सुरक्षित लैंड कर सकते हैं और पायलट की सूझबूझ से सभी यात्री सुरक्षित रहे।
इन घटनाओं के बीच Delhi एयरपोर्ट पर हुई ताजा टक्कर ने एक बार फिर एयर सेफ्टी को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस बार किसी भी यात्री या क्रू मेंबर को चोट नहीं आई, लेकिन इस तरह की घटनाएं यह संकेत जरूर देती हैं कि ग्राउंड ऑपरेशन में और सख्ती और सतर्कता की जरूरत है।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह मानवीय गलती थी, तकनीकी चूक या फिर समन्वय की कमी का नतीजा। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि जिम्मेदारी किसकी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
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