भवानीपुर में EVM को लेकर बवाल, TMC और भाजपा में टकरा
भवानीपुर विधानसभा सीट से जुड़े EVM स्ट्रॉन्ग रूम विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तनाव पैदा कर दिया है। भाजपा नेता Suvendu Adhikari और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह नया दौर चुनावी माहौल को और गर्म कर रहा है। कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल में स्थित EVM स्ट्रॉन्ग रूम इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है।

गुरुवार रात करीब 8 बजे ममता बनर्जी स्वयं स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचीं और लगभग चार घंटे तक अंदर रहीं। उनके इस दौरे ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए। इसके कुछ ही समय बाद यह खबर सामने आई कि सुवेंदु अधिकारी भी उसी स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा करने वाले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं और किसी भी संभावित गड़बड़ी को लेकर सतर्क हैं।
दरअसल, पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के स्ट्रॉन्ग रूम खोला गया और वहां संदिग्ध लोग मौजूद थे। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें कथित तौर पर कुछ अधिकारी और भाजपा से जुड़े लोग बैलट बॉक्स खोलने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
ममता बनर्जी ने स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर आने के बाद मीडिया से बात करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर EVM से छेड़छाड़ या मतगणना में किसी प्रकार की हेरफेर की कोशिश की गई, तो उनकी पार्टी इसके खिलाफ हर स्तर पर संघर्ष करेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव की घोषणा के बाद से राज्य की पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें निलंबन तथा कानूनी कार्रवाई की धमकियां दी जा रही हैं।
दूसरी ओर, Election Commission of India ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग का कहना है कि स्ट्रॉन्ग रूम में कोई भी अवैध गतिविधि नहीं हुई और वहां केवल पोस्टल बैलेट की छंटाई की जा रही थी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी EVM पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है।
EVM इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर विपक्षी दल इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग लगातार यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और कड़ी निगरानी में संचालित हो रही है।

EVM राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है। पश्चिम बंगाल में पहले से ही भाजपा और TMC के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है, ऐसे में इस तरह के आरोप चुनावी माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकते हैं।
EVM भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सुवेंदु अधिकारी का स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा इस बात का संकेत देता है कि पार्टी भी इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और अपनी ओर से स्थिति का आकलन करना चाहती है।
EVM जनता के बीच भी इस मामले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक ड्रामा बता रहे हैं, तो कुछ इसे लोकतंत्र की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर तीखी बहस जारी है।
आगे क्या होगा, यह काफी हद तक जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगा। यदि चुनाव आयोग अपने दावों को ठोस सबूतों के साथ साबित करने में सफल रहता है, तो विवाद शांत हो सकता है। लेकिन यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है, क्योंकि यही लोकतंत्र की असली ताकत है।
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