Middle East तनाव से तेल 126 डॉलर पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

Middle East तनाव से तेल 126 डॉलर पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

Middle East में जारी तनाव और संभावित युद्ध की आशंकाओं के बीच वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है। कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 126.31 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फिलहाल कीमतें थोड़ी नरमी के साथ 123 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही हैं, लेकिन बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

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Middle East इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान के खिलाफ संभावित हमलों को लेकर अहम ब्रीफिंग दी जानी है। अमेरिकी सेना के सेंटकॉम ने ‘छोटे लेकिन बेहद प्रभावी हमलों’ की रणनीति तैयार की है। इस योजना का उद्देश्य लंबे युद्ध में उलझना नहीं, बल्कि ईरान पर दबाव बनाकर उसे बातचीत की मेज पर लाना है। हालांकि, इस रणनीति ने वैश्विक बाजारों में डर और अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर देखा जा रहा है।

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Middle East ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि तेल की कीमतें जल्द ही 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प को गलत सलाह दी जा रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का भी मजाक उड़ाया और आरोप लगाया कि उनकी नीतियों की वजह से ही तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है।

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Middle East इस बीच, अमेरिका ने पहली बार युद्ध पर हुए खर्च का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो महीनों में अमेरिका ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों पर करीब 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भले ही युद्ध औपचारिक रूप से घोषित नहीं हुआ हो, लेकिन जमीनी स्तर पर गतिविधियां तेज हैं और इसका आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है।

तनाव को और बढ़ाने वाला एक और घटनाक्रम तब सामने आया जब Donald Trump ने सोशल मीडिया पर राइफल के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की। तस्वीर पर लिखा था—“नो मोर मिस्टर नाइस गाइ”, यानी अब नरमी नहीं बरती जाएगी। इस पोस्ट को ईरान के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है और इससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है।

दूसरी ओर, ईरान ने इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है।Middle East ईरान ने United Nations में शिकायत दर्ज कराते हुए अमेरिका पर उसके तेल से जुड़े जहाजों को जब्त करने और 38 लाख बैरल तेल कब्जाने का आरोप लगाया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि अब यह विवाद केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति का मुद्दा बन चुका है।

Middle Eastइस संघर्ष का असर केवल तेल बाजार या राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। लेबनान में हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, वहां करीब 12 लाख लोग भुखमरी के खतरे का सामना कर रहे हैं। युद्ध, विस्थापन और आर्थिक संकट ने हालात को बदतर बना दिया है, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।

Middle East भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच फोन पर बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने युद्धविराम, क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चा की। भारत की कोशिश है कि स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभाला जाए, क्योंकि इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापार पर पड़ सकता है।

तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट पर पड़ेगा। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें 140 डॉलर या उससे भी ऊपर जा सकती हैं। वहीं, अगर कूटनीतिक बातचीत सफल रहती है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और मानवीय चिंता का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या दोनों देश टकराव की राह पर आगे बढ़ते हैं या बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं।

America पर भरोसा नहीं: ईरान का सख्त संदेश, बातचीत से पहले ही बढ़ा तनाव

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