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LPG Cylinder Price Hike: फिर महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर पर ₹53.50 तक की बढ़ोतरी, जानिए नई कीमतें और असर

June 1, 2026 7:53 AM
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नई दिल्ली। देशभर में एक बार फिर एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए महंगाई की खबर सामने आई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इस बार कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में अधिकतम 53.50 रुपये तक की वृद्धि की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू उपयोग में आने वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का यह सिलसिला व्यापारियों, होटल संचालकों, ढाबा मालिकों और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा तो आने वाले दिनों में बाहर खाना-पीना और कई सेवाएं महंगी हो सकती हैं।

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में नई कीमतें

तेल कंपनियों द्वारा जारी संशोधित दरों के अनुसार देश के प्रमुख महानगरों में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ गई हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई है। पहले इसकी कीमत 3,071.50 रुपये थी। यानी उपभोक्ताओं को अब प्रति सिलेंडर 42 रुपये अधिक चुकाने होंगे।

कोलकाता में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है। यहां 53.50 रुपये की वृद्धि के बाद कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3,255.50 रुपये पहुंच गई है। यह देश के प्रमुख शहरों में सबसे महंगी दरों में से एक है।

मुंबई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3,024 रुपये से बढ़कर 3,067.50 रुपये हो गई है। यानी यहां 43.50 रुपये का इजाफा किया गया है।

वहीं चेन्नई में सिलेंडर की कीमत 3,237 रुपये से बढ़कर 3,283 रुपये हो गई है। यहां उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 46 रुपये अधिक देने होंगे।

5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत भी बढ़ी

केवल कमर्शियल सिलेंडर ही नहीं, बल्कि छोटे आकार के 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। उद्योग सूत्रों के अनुसार इसकी कीमत में 11 रुपये की वृद्धि हुई है।

दिल्ली में अब 5 किलो वाला छोटू सिलेंडर 821.50 रुपये में उपलब्ध होगा। इस सिलेंडर का उपयोग छोटे व्यवसायों, अस्थायी दुकानों, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और सीमित घरेलू जरूरतों के लिए किया जाता है। कीमत बढ़ने से छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।

घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत स्थिर

इस मूल्य वृद्धि के बीच सबसे बड़ी राहत घरेलू उपभोक्ताओं को मिली है। घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।

देशभर में करोड़ों परिवार खाना पकाने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। ऐसे में यदि इसकी कीमत बढ़ाई जाती तो आम जनता पर सीधा असर पड़ता। फिलहाल तेल कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर की दरों को यथावत रखा है, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रखने का फैसला महंगाई नियंत्रण और आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ से बचाने के उद्देश्य से लिया गया हो सकता है।

लगातार सातवें महीने बढ़े कमर्शियल सिलेंडर के दाम

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में यह कोई पहली वृद्धि नहीं है। जानकारी के अनुसार 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम लगातार सातवें महीने बढ़ाए गए हैं।

व्यापारिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले इस सिलेंडर को आम बोलचाल में “हलवाई सिलेंडर” भी कहा जाता है। मिठाई की दुकानों, रेस्टोरेंट्स, ढाबों, होटल उद्योग, कैटरिंग सेवाओं और फूड बिजनेस में इसका व्यापक उपयोग होता है।

लगातार बढ़ती कीमतों ने इन व्यवसायों की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी है। ऐसे में कई कारोबारियों के सामने या तो मुनाफा कम करने या फिर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत डालने की चुनौती खड़ी हो गई है।

बाहर खाना-पीना हो सकता है महंगा

विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने का सबसे बड़ा असर होटल और फूड इंडस्ट्री पर पड़ता है। खाना बनाने की लागत बढ़ने के कारण रेस्टोरेंट्स, ढाबे और फास्ट फूड आउटलेट्स अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

यदि एक मध्यम आकार का रेस्टोरेंट हर महीने कई कमर्शियल सिलेंडरों का उपयोग करता है तो उसकी कुल परिचालन लागत में हजारों रुपये की वृद्धि हो सकती है। यही कारण है कि उद्योग जगत के लोग लंबे समय से कमर्शियल गैस की कीमतों में स्थिरता की मांग कर रहे हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार गैस की कीमत बढ़ने का प्रभाव केवल भोजन तक सीमित नहीं रहता। कैटरिंग, बेकरी, मिठाई उद्योग और अन्य खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ता पर पड़ता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना कारण

एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता देखी जा रही है।

हालांकि पिछले सप्ताह शांति की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 11 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी। इसी दौरान इंडियन ऑयल बास्केट की कीमत भी 6 मार्च के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई थी।

लेकिन सप्ताह के पहले कारोबारी दिन फिर से कच्चे तेल में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड लगभग 2.55 प्रतिशत यानी 2.32 डॉलर की बढ़त के साथ 93.44 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।

ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले समय में पेट्रोलियम उत्पादों पर दबाव बना रह सकता है।

तेल कंपनियों को नुकसान का दावा

उद्योग सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियों को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये तक का नुकसान हो रहा है।

यही कारण है कि कंपनियां समय-समय पर कीमतों में संशोधन कर रही हैं ताकि बढ़ती लागत की भरपाई की जा सके। हालांकि इस संबंध में कंपनियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की कीमत निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय बाजार, आयात लागत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, परिवहन खर्च और सरकारी नीतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सरकार का क्या कहना है?

कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार लगातार यह कह रही है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है।

सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में सफलता हासिल की है। हालांकि बाजार आधारित मूल्य निर्धारण व्यवस्था के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों का प्रभाव घरेलू बाजार पर दिखाई देता है।

सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने की रही है, जिसके चलते इस बार भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

आम जनता और कारोबारियों की चिंता

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से व्यापारिक समुदाय चिंतित है। होटल और रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि लागत बढ़ने से व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

दूसरी ओर आम उपभोक्ता भी आशंकित हैं कि यदि यह बढ़ोतरी आगे भी जारी रही तो बाहर खाने-पीने का खर्च बढ़ सकता है। त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में इसका प्रभाव और अधिक देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार की दिशा ही यह तय करेगी कि एलपीजी की कीमतों में आगे राहत मिलेगी या फिर बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहेगा।

 

देशभर में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 53.50 रुपये तक की बढ़ोतरी लागू हो गई है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत प्रमुख शहरों में नई दरें प्रभावी हो चुकी हैं। साथ ही 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत भी बढ़ाई गई है। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर यह है कि 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

लगातार सातवें महीने हुई यह बढ़ोतरी फूड इंडस्ट्री और छोटे कारोबारियों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई है। अब सभी की निगाहें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार और भविष्य की मूल्य समीक्षा पर टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर देश की ऊर्जा लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

Admin

ओम भारद्वाज एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह India Insights News के संस्थापक एवं मालिक हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ वह समाजसेवा और जनहित के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। अपनी वेबसाइट और न्यूज़ चैनल के माध्यम से वह जनता की आवाज़ को मंच देते हैं और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष पत्रकारिता के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।

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