जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने आमजन को बड़ी राहत देते हुए File प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। अब जेडीए में लंबित फाइलों की पूरी स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी। इसके तहत अधिकारी और कर्मचारी File पर जो भी टिप्पणी यानी नोटिंग करेंगे, उसे भी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने, बार-बार आपत्तियां लगाने और आवेदकों को चक्कर कटवाने जैसी समस्याओं पर रोक लगाना है।

जेडीए सचिव की ओर से मंगलवार को जारी आदेश में छह प्रकार की फाइलों की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे अब आवेदकों को यह जानने में आसानी होगी कि उनकी File किस अधिकारी के पास है, उसमें क्या कमी है और किन नियमों के कारण काम रुका हुआ है।
दरअसल, लंबे समय से जेडीए में फाइलों के निस्तारण में देरी को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार लोग महीनों तक अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते थे, लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती थी कि उनकी File आखिर रुकी क्यों है। कुछ मामलों में अनावश्यक टिप्पणियों और तकनीकी आपत्तियों के कारण भी फाइलें लंबित रहती थीं। अब नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद इन समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
जेडीए के आदेश के अनुसार जिन सेवाओं को ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, उनमें ई-पट्टा (फ्री होल्ड और लीज डीड), नामांतरण यानी नाम ट्रांसफर, उपविभाजन (सब डिविजन), रिकॉन्स्टीट्यूशन यानी पुनर्गठन और वन टाइम लीज सर्टिफिकेट (OTLC) जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इन सभी फाइलों को अब SSO आईडी के जरिए जेडीए सर्विस पोर्टल के डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी आवेदन में कोई कमी पाई जाती है या अधिकारी किसी दस्तावेज को लेकर आपत्ति दर्ज करता है, तो उसे उसका स्पष्ट कारण भी बताना होगा। सिर्फ सामान्य टिप्पणी लिखकर File को लंबित नहीं रखा जा सकेगा। अधिकारी-कर्मचारियों को यह भी बताना होगा कि किस नियम या प्रावधान के तहत संबंधित नोटिंग की गई है।
जेडीए प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि नोटिंग की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि आम व्यक्ति भी आसानी से समझ सके कि उसकी File में क्या समस्या है। इससे आवेदकों को बार-बार कार्यालय जाकर जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे घर बैठे ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पूरी स्थिति देख सकेंगे।
अब तक कई फाइलें ऑनलाइन आवेदन के बावजूद ऑफलाइन प्रक्रिया से भी गुजरती थीं। इसी कारण फाइलों की ट्रैकिंग आसान नहीं थी और कई बार अलग-अलग स्तरों पर फाइलें अटक जाती थीं। लेकिन अब हर मूवमेंट और हर नोटिंग को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे File किस स्तर पर लंबित है, इसकी पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। जब हर टिप्पणी और कार्रवाई ऑनलाइन रिकॉर्ड होगी, तब अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। साथ ही आमजन को भी अपने अधिकारों और प्रक्रिया की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सकेगी।
डिजिटल सिस्टम लागू होने से जेडीए के कामकाज में भी तेजी आने की संभावना है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए वरिष्ठ अधिकारी भी यह देख सकेंगे कि कौन-सी फाइल कहां और कितने समय से लंबित है। इससे विभागीय स्तर पर निगरानी मजबूत होगी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
राज्य सरकार लगातार सरकारी सेवाओं को डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में जेडीए की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे न केवल आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ेगा। आने वाले समय में यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो अन्य विभागों में भी इसी तरह की डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जा सकती है।